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ओवैसी का मोदी से सीधा सवाल ट्रंप कर सकता है तो भारत क्यों नहीं

Satyakhabarindia

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने एक बड़ी और संवेदनशील मांग रखी है। मुंबई में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में की गई कार्रवाई का हवाला दिया और सीधे प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी दूसरे देश में कार्रवाई कर सकते हैं तो भारत ऐसा क्यों नहीं कर सकता। ओवैसी ने इस बयान को राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे से जोड़ते हुए कहा कि देश की जनता 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के दोषियों को अब भी सजा दिलते देखना चाहती है।

मसूद अजहर और 26/11 के गुनहगारों को भारत लाने की मांग

ओवैसी ने मंच से प्रधानमंत्री मोदी से अपील करते हुए कहा कि मसूद अजहर और लश्कर ए तैयबा से जुड़े उन आतंकियों को भारत लाया जाना चाहिए जो 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार मजबूत इरादों के साथ कदम उठाए तो यह संभव है। ओवैसी ने प्रधानमंत्री के पुराने बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि जब सरकार खुद को मजबूत नेतृत्व वाली सरकार बताती है तो फिर आतंकवाद के मुद्दे पर पीछे क्यों हटती है। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद पर सिर्फ बयानबाजी नहीं बल्कि ठोस और निर्णायक कार्रवाई की जरूरत है।

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ओवैसी का मोदी से सीधा सवाल ट्रंप कर सकता है तो भारत क्यों नहीं

अमेरिका की वेनेजुएला कार्रवाई का दिया उदाहरण

ओवैसी का यह बयान अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में की गई सैन्य कार्रवाई के बाद सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार जनवरी की शुरुआत में अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस में कार्रवाई की और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लेकर अमेरिका ले जाया गया। इसी घटना का हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा कि जब अमेरिका अपने हितों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए इतनी बड़ी कार्रवाई कर सकता है तो भारत को भी अपने शहीदों और पीड़ितों के लिए कठोर कदम उठाने चाहिए। उनका कहना था कि 26/11 केवल एक हमला नहीं था बल्कि भारत की आत्मा पर किया गया हमला था।

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राजनीतिक बयान या राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल

ओवैसी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जहां एक ओर उनके समर्थक इसे आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख बता रहे हैं वहीं दूसरी ओर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच इस मुद्दे पर नई बहस छिड़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी दूसरे देश में इस तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीति से जुड़ा बेहद संवेदनशील विषय है। हालांकि ओवैसी का कहना है कि अगर आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कदम नहीं उठाए गए तो ऐसे हमले भविष्य में दोहराए जा सकते हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या यह बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर कोई बड़ा असर डालता है।

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